Hindi Shayari Archive

Chamkta sooraj bhi sham ko dhal jata hai

Chamkta sooraj bhi sham ko dhal jata hai Andheri raat ke baad ,phir se jeewan mein

चमकता सूरज भी शाम को ढल जाता है

चमकता सूरज भी शाम को ढल जाता है | अँधेरी रात के बाद , फिर से

Dil ne bhi tujhe, na jane kya samjha tha

Dil ne bhi tujhe, na jane kya samjha tha Nikali tu bewafa , jise dil ne

बड़ी उलझन में है दिल , आज ये सोच कर |

बड़ी उलझन में है दिल , आज ये सोच कर | बिताए थे हंसी लम्हे जिनके

छ्ट रही है जिंदगी , ना जाने कब इसकी शाम हो

छ्ट रही है जिंदगी , ना जाने कब इसकी शाम हो | थी तमन्ना बस इतनी