Hindi Poems Archive

Khoob Ladi Murdani Voh To Jhansi Wali Rani Thi

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी

Ek Bhi Aanshu Na Kar Bekar

एक भी आँसू न कर बेकार जाने कब समंदर मांगने आ जाए! पास प्यासे के कुआँ

Nur Ho Na Nirash Karo Man Ko

नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो जग में रहके

Kisko Naman Karu Mein Bharat?

A beautiful poem by Dinkar ji about the spirit of India. तुझको या तेरे नदीश, गिरि,

Raat Yo Kahne Laga Mujse Gagan ka Chaand

रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव है । उलझनें