फिर याद आता है हमको , वो बीता हुआ अपना बचपन


फिर याद आता है हमको , वो बीता हुआ अपना बचपन |
वो सावन की बारिश में भीगना ,फिर घर में आके डर के छुप जाना ||

वो मम्मी से कहना डर के , दोस्तों ने मुझको भिगाया |

वो बारिश के पानी में अपनी कागज़ की नाव चलाना |
और नाव की दौड़ में , आगे निकलने पे गुरूर खाना ||

स्कूल जाने में रूठ जाना , लंच करने के बाद पेट दर्द का बहाना |
आके घर वापस , थोडा सा सोके , फिर दोस्तों के साथ खेलने जाना ||

वो दादी की मीठी कहानिया , चाँद तारो की अनोखी सच्चाईया |
सुनते-२ ही कहानी में खो जाना , और दादी की गोद में सो जाना ||

फिर याद आता है हमको , वो बीता हुआ अपना बचपन |
(BY SPT)

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