फिर से एक तमन्ना मचली है आज

फिर से एक तमन्ना मचली  है आज
क्यों ना इजहारे-ऐ-मोह्हबत कर दे
वो तो रहेगे हमेशा खामोश यूं ही
क्यों ना हम ही इस मोह्हबत की शुरुबात कर दे …..BY SPT

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