कट रही है जिंदगी एक अनछुए एहसास से |


कट रही है जिंदगी एक अनछुए एहसास से |
क्या पता कल क्या हो , बेखबर है अंजाम से ||

कब तलग भागेगे ऐसे , जिंदगी की दौड़ में |
एक पल भी ना सुकून है हमको , जीतने की होड़ में ||

हर तरफ फैली है त्रष्णा, हर तरफ ही विरोध है |
भटक सा गया है मानव , ना जाने कैसी ये होड़ है ||

जायेगे जब हम इस धरा से , साथ ना कुछ ले जायेगे |
प्यार के ही २ बोल अपने , बस यहा रह जायेगे ||
(BY SPT)

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